आयुर्वेद के अनुसार टाइप 2 मधुमेह का संबंध वात और कफ दोष के असंतुलन से होता है। शरीर में रस और मेद धातु की कमजोरी से ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया बाधित हो जाती है।
शुगर एक जल का रोग है। इन सभी में जल अत्यंत आवश्यक है। हमारा शरीर हो या पृथ्वी या ब्रह्माण्ड सभी 70% जल से निर्मित है। कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर में शक्ति प्रदान करता है। कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया बाधित होने पर डायबिटीज रोग उत्पन्न होता है। कार्बोहाइड्रेट ऑक्सीजन, हाईड्रोजन और कार्बन से मिलकर बनता है। जब कार्बोहाइड्रेट का किन्हीं कारणों से यह विघटन (प्रक्रिया) नहीं होता है, तो शरीर को कार्य कराने वाली ऊर्जा भी नहीं बन पाती है। एंजाइम कोशिकाओं (cells) के अंदर कार्बन डाई ऑक्साइड और जल में तोड़ देते है। इस प्रक्रिया के दौरान उत्पन ऊर्जा शरीर को मिलती है, कार्बन डाई ऑक्साइड फेफड़ों द्वारा बहार निकाल दी जाती है जबकि जल रक्त में ही मिल जाता है या फिर बहुत अधिक होने पर यही जल (शर्करा) मूत्र के माध्यम से बहार निकलता है।
🩺 क्या है टाइप 2 मधुमेह?
मधुमेह कोई नया रोग नहीं है, यह पुरातन काल से चला आ रहा है। आज का टाइप 2 डायबिटीज आयुर्वेद के अनुसार प्रेमेह के वातज प्रमेह का ओजोमेह का रोग है, यानि कि ओज का रोग है। योग में ओज का रोग को संपूर्ण शरीर का रोग कहा जाता है। डायबिटीज का मूल कारण शारीरिक श्रम न करना, दिनचर्या ऋतुचर्या के नियमों का पालन न करना, एक जैसा भोजन करते रहना, मानसिक तनाव में रहना है।
🔹 डायबिटीज टाइप 2 के कारण
1. भोजन एक जैसा करते रहना। 2. भोजन में अधिक कार्बोहाइड्रेट या ग्लुकोज़ लेते रहना। 3. शारीरिक श्रम या योग न करना 4. लीवर की अल्प सक्रियता 5. किडनी की अल्प सक्रियता 6. कृत्रिम कैमिकल, प्रिजर्वेटिव और जैनेटिक मोडिफाई सब्जी, फल एवं भोजन करते रहना।
🔹 परहेज
1. ऋतु के अनुसार भोजन करना, सभी तरह के सब्जी एवं फल लेना। 2. दो घंटे प्रतिदिन व्यायाम या योग करना 3. दूध की बनी चीज़ न ले। 4. कार्बोहाइड्रेट का कम से कम सेवन करे। 5. गेहूं न ले, बाकी सभी तरह का अनाज ले। 6. शाम के भोजन और सुबह के भोजन में 15 घंटे का अंतराल रहे। 7. भोजन के साथ साथ कच्ची सलाद 25% रखे। 8. भोजन के मध्य में पानी पिए, बाद में और पहले न पिए। 9. मल मूत्र, प्यास, भूख के वेग को न रोकना, क्रोध, लोभ, शोक, बदबू एवं वीभत्स दृश्य से वचाब रखें। 10. मीठा, गरिष्ठ भोजन, तिल या तेल, खट्टे द्रव्य, अधिक भोजन नही करना है। 11. बाजार का पैकेट बंद उत्पाद नहीं लेना है।
💪 डोज़ (bodey weight 55 to 70kg) –
छार भस्म और शोधित चुना :- एक चाय के चमच्च के बराबर छार भस्म और एक गेहूँ के दाने के बराबर शोधित चूना को तीन लीटर पानी में रात को गोल बर्तन जैसे मिट्टी का घड़ा या स्टील या ताम्र के घड़े में घोलकर रखें, सुबह इसी पानी को सूती कपड़े में छानकर किसी अन्य बर्तन में रख ले। पूरे दिन इसी पानी को पीना है और आगे भी इसी पानी को पीते रहना है।
सुबह खाली पेट 3 ग्राम जामुन का चूर्ण गर्म पानी से ले, इसके बाद 20 ml गुड़मार अर्क+ 40 ml पानी मिलाकर ले।
शाम को खाली पेट खाली पेट 3 ग्राम जामुन का चूर्ण गर्म पानी से ले, इसके बाद 20 ml गुड़मार अर्क+ 40 ml पानी मिलाकर ले।
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