भोजन में उपलब्ध कार्बोहाइड्रेट के दोषयुक्त चयापचय(metabolism) के कारण रक्त में शुगर कोशिकाओं (cells) द्वारा उपयोग नहीं हो पाता है, इसी कारण रक्त में एकत्रित होकर मूत्र से बाहर निकलता है, इसी को मधुमेह या डायबिटीज कहते है।
हमारा शरीर कुदरत के पांच तत्वों से निर्मित है। भोजन को पंचतत्वों के आधार पर विभाजित किया जा सकता है –
1. प्रोटीन
2. वसा
3. कार्बोहाइड्रेट
4. विटामिन्स एवं मिनरल्स
5. जल( water)
शुगर एक जल का रोग है। इन सभी में जल अत्यंत आवश्यक है। हमारा शरीर हो या पृथ्वी या ब्रह्माण्ड सभी 70% जल से निर्मित है। कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर में शक्ति प्रदान करता है। कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया बाधित होने पर डायबिटीज रोग उत्पन्न होता है। कार्बोहाइड्रेट ऑक्सीजन, हाईड्रोजन और कार्बन से मिलकर बनता है। जब कार्बोहाइड्रेट का किन्हीं कारणों से यह विघटन(प्रक्रिया) नहीं होता है, तो शरीर को कार्य कराने वाली ऊर्जा भी नहीं बन पाती है। एंजाइम कोशिकाओं(cells) के अंदर कार्बन डाई ऑक्साइड और जल में तोड़ देते है। इस प्रक्रिया के दौरान उत्पन ऊर्जा शरीर को मिलती है, कार्बन डाई ऑक्साइड फेफड़ों द्वारा बहार निकाल दी जाती है जबकि जल रक्त में ही मिल जाता है या फिर बहुत अधिक होने पर यही जल(शर्करा) मूत्र के माध्यम से बहार निकलता है।
मधुमेह कोई नया रोग नहीं है, यह पुरातन काल से चला आ रहा है। आज का टाइप 2 डायबिटीज आयुर्वेद के अनुसार प्रेमेह के वातज प्रमेह का ओजोमेह का रोग है, यानि कि ओज का रोग है। योग में ओज का रोग को संपूर्ण शरीर का रोग कहा जाता है।
डायबिटीज का मूल कारण शारीरिक श्रम न करना, दिनचर्या ऋतुचर्या के नियमों का पालन न करना, एक जैसा भोजन करते रहना, मानसिक तनाव में रहना है।
जब हम खाना खाते हैं तो उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट (जैसे रोटी, चावल, आलू, फल) पचकर ग्लूकोज़ में बदल जाते हैं। यह ग्लूकोज़ खून (Blood) में पहुँचता है और वहीं से कोशिकाओं तक जाता है। गुड़मार और जामुन दोनों के संयोग से के कोशिकाओं (Cell) के दरवाज़े खोलते है, ताकि ग्लूकोज़ अंदर जा सके, कुलमिलाकर गुड़मार और जामुन दोनों इंसुलिन की सहायता करते है।
🔹 Reason of Diabetes Type ‘Two’ –
1. भोजन एक जैसा करते रहना।
2. भोजन में अधिक कार्बोहाइड्रेट या ग्लुकोज़ लेते रहना।
3. शारीरिक श्रम या योग न करना
4. लीवर की अल्प सक्रियता
5. किडनी की अल्प सक्रियता
6. कृत्रिम कैमिकल, प्रिजर्वेटिव और जैनेटिक मोडिफाई सब्जी, फल एवं भोजन करते रहना।
🔹 परहेज
1. ऋतु के अनुसार भोजन करना, सभी तरह के सब्जी एवं फल लेना।
2. दो घंटे प्रतिदिन व्यायाम या योग करना
3. दूध की बनी चीज़ न ले।
4. कार्बोहाइड्रेट का कम से कम सेवन करे।
5. गेहूं न ले, बाकी सभी तरह का अनाज ले।
6. शाम के भोजन और सुबह के भोजन में 15 घंटे का अंतराल रहे।
7. भोजन के साथ साथ कच्ची सलाद 25% रखे।
8. भोजन के मध्य में पानी पिए, बाद में और पहले न पिए।
9. मल मूत्र, प्यास, भूख के वेग को न रोकना, क्रोध, लोभ, शोक, बदबू एवं वीभत्स दृश्य से वचाब रखें।
10. मीठा, गरिष्ठ भोजन, तिल या तेल, खट्टे द्रव्य, अधिक भोजन नही करना है।
11. बाजार का पैकेट बंद उत्पाद नहीं लेना है।
🔹 मुख्य कारण (Causes of Type 2 Diabetes)
असंतुलित आहार (मीठा, तला हुआ, प्रोसेस्ड फूड)
मोटापा और व्यायाम की कमी
तनाव और अनियमित दिनचर्या
पारिवारिक इतिहास
🌿 आयुर्वेदिक उपचार और जड़ी-बूटियाँ
आयुर्वेद में टाइप 2 मधुमेह को “गुड़मार” कहा गया है। यह कफ और मेद दोष की वृद्धि से उत्पन्न होता है।
प्रमुख औषधियाँ:
गुड़मार (Gudmar) – शुगर अवशोषण कम करता है
कालमेघ – प्राकृतिक इंसुलिन एक्टिवेटर
जामुन चूर्ण – ग्लूकोज़ लेवल घटाता है
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